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सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री के खिलाफ चुनाव आयोग सख्त, कार्रवाई के निर्देश

चुनाव आयोग के अनुसार, किसी भी भ्रामक या कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा तैयार अथवा छेड़छाड़ की गई सामग्री पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

19 Apr 2026

सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री के खिलाफ चुनाव आयोग सख्त, कार्रवाई के निर्देश

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव और 8 सीटों पर हो रहे उपचुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम, 2021 तथा आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों के तहत सभी संबंधित पक्षों को डिजिटल मंचों का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करना होगा।

चुनाव आयोग के अनुसार, किसी भी भ्रामक या कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा तैयार अथवा छेड़छाड़ की गई सामग्री पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और प्रचार से जुड़े प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कृत्रिम रूप से तैयार या परिवर्तित सामग्री को स्पष्ट रूप से ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता जनित’ या ‘डिजिटल रूप से परिवर्तित’ के रूप में चिह्नित किया जाए और उसके स्रोत की जानकारी भी दी जाए।

आयोग ने बताया कि असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान सोशल मीडिया सामग्री की निगरानी की जा रही है। आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली, कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली या मतदान प्रक्रिया को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने वाली सामग्री पर संबंधित प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया है कि 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद से अब तक 11 हजार से अधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें सामग्री हटाना, प्राथमिकी दर्ज करना, स्पष्टीकरण मांगना और खंडन शामिल हैं।

इसके अलावा, आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के चुनाव प्रचार पर रोक रहेगी और सभी माध्यमों को इसका सख्ती से पालन करना होगा।

आयोग ने बताया कि नागरिक, राजनीतिक दल और उम्मीदवार सी-विजिल माध्यम के जरिए आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच इस माध्यम से 3 लाख 23 हजार 99 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 96 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा 100 मिनट की निर्धारित समय सीमा के भीतर किया गया।

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